एफडीआई से किसान तबाह हो जाएंगे
सरकार अमेरिका तथा यूरोप की आर्थिक संकट सुधारने के लिए अपनी स्थिति बिगाड़ रही है। केंद्र की संप्रग नीत सरकार को किसानों, खुदरा व्यापारियों और आम लोगों की चिंता नहीं है और वह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों में काम कर रही है।
खुदरा एफडीआई विरोधी राष्ट्रीय मोर्चे के एक कार्यक्रम में जोशी ने संवाददाताओं से कहा, ‘अमेरिका तथा यूरोप की आर्थिक स्थिति बिगड़ी हुई है। अमेरिकी चुनाव में बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है एवं वहां अन्य आर्थिक समस्याएं हैं। इससे पार पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा एवं अन्य पश्चिमी देशों का खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी देने को लेकर खासा दबाव था और सरकार ने उसी दबाव में यह कदम उठाया है।’
देश में
१ करोड़ ४० लाख खुदरा दुकाने है ४ से ५ करोड़ लोग उन दुकानों में काम करते है और उनसे जुड़े २० करोड़ लोगो की रोजी- रोटी ,अजीविका का साधन है खुदरा व्यापर ,उन सबको
सडको पर लाना चाहते है प्रधानमंत्री ....
आज २५ से ३० लाख करोड़ का खुदरा व्यापर का Economic साइज़
है जो २१०४ तक ५० लाख करोड़ होने वाला है और २०२० तक १०० लाख crore हो
जायेगा पर सरकार इस Economy
को सौपना चाहती है विदेशी
हांथो में
आर्थिक गुलामी की और देश को धकेलना चाहती है ..

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